मंत्री गौतम दक की विधानसभा घोषणा थोथी साबित हुई, सहकारिता रजिस्ट्रार कार्यालय में धूल फांक रही 25 लाख किसानों के बीमा की फाइल

सहकार भारत

बीकानेर, 4 मई। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 की चकाचौंध के बीच राजस्थान में सहकारिता विभाग निरंकुश और सहकारिता आंदोलन दिशाहीन होने की कगार पर पहुंच गया है। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली प्रदेश की भाजपा सरकार का डेढ़ साल का कार्यकाल होने को है, लेकिन सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम दक के पास अपने विभाग की उपलब्धि के नाम पर उदासीन और रजिस्ट्रार से खौफजदा सहकारी अधिकारियों की फौज और एक गर्ममिजाज ब्यूरोक्रेेट श्रीमती मंजू राजपाल हैं, जिन्हें मंत्री या सरकार या विधानसभा की भी परवाह नहीं है।

प्रमुख शासन सचिव (सहकारिता) और रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के पद की दोहरी जिम्मेदारी उठाने वाली मंजू राजपाल की डांट-डपट वाली कार्यशैली से विभाग के सारे अफसर इस कदर सहमे हुए हैं कि बुलावे पर भी जाने से कतराते हैं। एक वरिष्ठ सहकारी अफसर का रजिस्ट्रार मैडम के विरुद्ध शिकायती पत्र भी इन दिनों काफी वायरल हो रखा है, कई बार भरी मिटिंग में सार्वजनिक रूप से मैडम से लताड़ खा-खाकर परेशान हो चुका था।

यह गौतम दक के नेतृत्व की कमजोरी ही मानी जायेगी कि राज्य विधानसभा के बजट सत्र में घोषणा के बावजूद आज तक किसानों की बीमा योजनाएं धरातल पर नहीं उतरी। दक ने घोषणा की थी कि अल्पकालीन ऋण लेने वाले किसानों से सम्बद्ध दोनों बीमा योजनाओं को हर हाल में 31 मार्च 2025 तक लागू कर दिया जायेगा, ताकि 1 अप्रेल से नये सीजन में क्रॉप लोन लेने वाले किसानों को बीमा का सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके। 31 मार्च को बीते एक महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन बीमा योजनाओं का लाभ मिलना शुरू होना तो दूर, टेंडर के बाद, रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के कार्यालय में अनुमोदन के लिए भेजी गयी बीमा सम्बंधी फाइल आज दिनांक तक राजस्थान राज्य सहकारी बैंक को नहीं लौटायी गयी। रजिस्ट्रार के अनुमोदन के पश्चात ही, राज्य बैंक और बीमा कम्पनी के मध्य एमओयू होता है।

किसानों को मिलता है दो बीमा सुरक्षा योजनाओं का कवच

दरअसल, केंद्रीय सहकारी बैंकों और ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से अल्पकालीन सहकारी फसली ऋण लेने वाले किसानों को दो बीमा योजनाओं का सुरक्षा कचव मिलता है, इनमें एक है, राज सहकार दुर्घटना बीमा योजना और दूसरी है, राज सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना। रबी और खरीफ सीजन में कृषि कर्ज लेने वाले प्रदेश के 25 लाख किसानों का बीमा अनिवार्य रूप से किया जाता है। बीमा कम्पनी का चयन और उसके साथ एमओयू राजस्थान राज्य सहकारी बैंक यानी अपेक्स बैंक, जयपुर के स्तर पर होता है।

किसान की मृत्यु हुई तो क्लेम कौन देगा

इस साल 18 मार्च 2025 को अपेक्स बैंक ने दोनों बीमा योजनाओं के लिए टेंडर फाइनल कर दिये और बीमा की फाइल 25 मार्च को स्वीकृति के लिए रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां मंजू राजपाल को भेज दी गयी। रजिस्ट्रार द्वारा ‘डिस्कस’ लिखे जाने के बाद से इस पत्रावली के स्टेटस में आज तक कोई परिवर्तन नहीं आया है। 25 लाख से अधिक किसानों के बीमा से जुड़ी यह अत्यंत महत्वूपर्ण फाइल मंजू राजपाल के कार्यकाल में डेढ़ माह से धूल नहीं फांक रही है। इससे साफ हो जाता है कि सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम दक की अपने विभाग पर कितनी ‘गहरी’ पकड़ है।

जयपुर, चित्तौडग़ढ़ और कोटा के बीच मालाएं पहनने के चक्कर में वे यह भी भूल गये कि मंत्री द्वारा विधानसभा में की गयी घोषणा और चुनावी वादे में कोई अंतर भी होता है। केंद्रीय सहकारी बैंकों में 1 अप्रेल 2025 से नये सीजन के लिए फसली ऋण का वितरण शुरू हो चुका है। अब सवाल यह है कि दुर्भाग्य ये, 1 अप्रेल 2025 से लेकर बीमा योजना क्रियान्वित होने की दिनांक तक, यदि किसी किसान की मृत्यु हो जाती है तो उसका क्लेम कौन देगा? बीमा कम्पनी, जिसके साथ अभी तक एमओयू ही नहीं हुआ? या केंद्रीय सहकारी बैंक अथवा ग्राम सेवा सहकारी समिति?

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