
सहकार भारत
बीकानेर, 9 जून। सहकारिता विभाग के हैड ऑफिस (कार्यालय, रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां) में सक्षम स्तर की अनुमति के बिना एयरकंडीशनर लगाने-लगवाने के मामले में चार सीनियर सहकारी अफसरों को चार्जशीट प्रस्तावित की गयी है। को-ऑपरेटिव रजिस्ट्रार श्रीमती मंजू राजपाल ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) 1958 के नियम 16 के तहत चार अफसरों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तावित किया है। इन अफसरों में तीन वरिष्ठ अतिरिक्त पंजीयक और एक अतिरिक्त पंजीयक है।
पूरा वाकिया यह है कि नेहरू सहकार भवन में संचालित सहकारिता विभाग के प्रधान कार्यालय में पिछले साल सर्दियों के दौरान सेंट्रल एसी सिस्टम का सामान चोरी हो गया था। इससे सेंट्रल सिस्टम से जुड़े 80 एसी काम करना बंद कर गये। इसमें सहकारिता रजिस्ट्रार मंजू राजपाल का दफ्तर भी शामिल है। उसके बाद से अब तक इसे ठीक नहीं कराया गया।
गर्मी बढ़ते ही सहकारिता विभाग के दो बड़े अफसरों – सुरेंद्र सिंह राठौड़, अतिरिक्त पंजीयक (बैंकिंग) और संदीप खंडेलवाल, अतिरिक्त पंजीयक (द्वितीय) ने अपने-अपने कमरों में एयरकंडीशनर लगवा लिये। सुरेंद्र सिंह को एपेक्स बैंक ने तथा संदीप खंडेलवाल को राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक (एसएलडीबी) ने एसी उपलब्ध कराया। इन दो अफसरों के दफ्तर में एसी लगवाने और लगाने के लिए सक्षम स्तर से अनुमति नहीं ली गयी। श्रीमती मंजू राजपाल ही एपेक्स बैंक की प्रशासक हैं। उन्हें भी अपने माताहत दो अफसरों द्वारा अपने यहां एसी लगाने की जानकारी एक राज्यस्तरीय अखबार में समाचार प्रकाशित होने से लगी। जब ये एसी लगे, तब सहकारिता रजिस्ट्रार श्रीमती मंजू राजपाल स्वयं गर्मी में बिना एसी के बैठी थी और उन्होंने अपने दफ्तर में आज तक एसी नहीं लगवाया।
नोटिस, सदबुद्धि धरना और चार्जशीट
इस मामले में एपेक्स बैंक के एम.डी. संजय पाठक, एसएलडीबी के एमडी जितेंद्र प्रसाद, अतिरिक्त पंजीयक (बैंकिंग) सुरेंद्र सिंह राठौड़ और अतिरिक्त पंजीयक (द्वितीय) संदीप खंडेलवाल को नोटिस जारी किये गये। इस बीच, मई माह के अंत में संजय पाठक की अगुवाई में सहकारी अफसरों का एक प्रतिनिधिमंडल रजिस्ट्रार से मिला और सेंट्रल एसी सिस्टम शुरू करवाने का आग्रह किया। संजय पाठक सहकारी अफसरों की यूनियन के अध्यक्ष हैं। लेकिन रजिस्ट्रार ने एसी का सामान चोरी होने के बाद इसे ठीक करवाने के मामले में हुई लापरवाही के मामले में जिम्मेदारी तय होने तक ऐसा करने में असमर्थता जता दी।
इसके अगले ही दिन सहकारिता विभाग के कुछ कर्मचारी, नेहरू सहकार भवन में बिना इजाजत धरने पर बैठ गये, जिसे सदबुद्धि धरने का नाम दिया गया। इस कार्यवाही ने आग में घी का काम किया। रजिस्ट्रार ने चारों अफसरों के जवाब को अंतोषजनक मानते हुए इनके खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) 1958 के नियम 16 की चार्जशीट प्रस्तावित कर दी। अब यह चार्जशीट अनुमोदन के लिए सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम दक के पास पड़ी है।
सहकारिता विभाग में एपीओ की आड़ में अफसरों को मनचाहे पद पर लगाने का खेल जारी






