लाखों रुपये के गबन की दस्तावेती सुबूतों के साथ शिकायत, सहकारिता विभाग डेढ़ माह में जांच अधिकारी ही नियुक्त नहीं कर पाया

सहकार भारत

बीकानेर, 15 सितम्बर। राजस्थान सरकार की भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जुमला साबित हो रही है। इसकी एक बानगी, गंगानगर जिले की 4 ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति है, जिसके मिनी बैंक में 91 लाख रुपये गबन/वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर जांच के आदेश आज तक जारी नहीं हुए हैं। यह स्थिति तब है जब शिकायतकर्ता ने वैधानिक दस्तावेज की श्रेणी में वर्गीकृत 9 साल की ऑडिट रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में शिकायत के साथ संलग्न कर सहकारिता विभाग के काम को बहुत आसान कर दिया है।

शिकायतकर्ता विजयकुमार ने सहकार भारत को बताया कि अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में मुख्यमंत्री, सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव और रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से शिकायत प्रेषित की गयी थी। शिकायत में 9 साल की ऑडिट रिपोर्ट को साक्ष्य में रूप में संलग्न किया गया, जिसमें स्पष्ट है कि गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक की करणपुर शाखा कार्यक्षेत्र की 4 ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति लिमिटेड के मिनी बैंक में पिछले कई साल से लगातार जमाकर्ताओं के धन का दुरूपयोग/गबन किया जा रहा है। नौ साल पहले की ऑडिट रिपोर्ट में 36 लाख रुपये का ऋणात्मक अंतर है, जिससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय अनियमितता का सिलसिला इससे भी पहले के वर्षों से चलता आ रहा है। इससे ऑडिट और बैंक द्वारा करवाये जाने वाले वार्षिक निरीक्षण की गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।

विजयकुमार ने बताया कि एक ओर सहकारिता मंत्री गौतमकुमार दक भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का लागू करने और वित्तीय अनियमितता करने वालों की वित्तीय पावर्स सीज करने जैसे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर, जयपुर से लेकर गंगानगर तक के सहकारी अधिकारी एक प्रमाणित घोटाले को छुपाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि शिकायत भेजे जाने को डेढ़ माह बीत जाने के बावजूद आज तक जांच अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई, जिससे सहकारी अधिकारियों की नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है। इससे पता चलता है कि जयपुर के बड़े विभागीय अधिकारी, अपने साथियों को बचाने का और गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक के अधिकारी अपने कर्मचारियों, विशेषकर इस अवधि में सोसाइटी का निरीक्षण करने वाले और श्रीकरणपुर शाखा में पदस्थापित रहे शाखा प्रबंधकों के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

मंजू राजपाल खामोश क्यों हैं?

इस मामले में सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव और सहकारिता रजिस्ट्रार श्रीमती मंजू राजपाल की खामोशी हैरान-परेशान करने वाली है। वे बेहद कठोर प्रशासक मानी जाती है और पिछले साल भर से अपने निर्णयों से वे इसे कई बार साबित भी कर चुकी हैं। एक सामान्य प्रकरण में सहकारिता सेवा के चार सीनियर अफसरों के खिलाफ सीसीए रूल्स की कार्यवाही को अंजाम देने वाली श्रीमती मंजू राजपाल ने इस बेहद गंभीर प्रकरण पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि 4 ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष लखविंद्रसिंह लखियां ने मंजू राजपाल को हाईकोर्ट में घसीट रखा है। लखियां ने उपभोक्ता संघ के चुनाव कराये जाने को लेकर प्रमुख शासन सचिव (सहकारिता) और सहकारिता रजिस्ट्रार के रूप मंजू राजपाल के खिलाफ जोधपुर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर रखी है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मंजू राजपाल के मातहत सहकारी अफसर, विशेषकर प्रधान कार्यालय के बैंकिंग अनुभाग के अधिकारी ही उन्हें सही राय नहीं दे रहे? क्या इस प्रकृति के गंभीर प्रकरणों को छुपाने का उद्देश्य मंजू राजपाल की आर्थिक अपराधियों के प्रति कठोर छवि को धूमिल करना और अपने सीनियर अफसर को आरोप पत्र दिये जाने के प्रकरण की खीझ उतारना है? (फोटो दैनिक भास्कर से साभार)

एक और नामचीन सहकारी समिति में लाखों रुपये के गबन का आरोप, मुख्यमंत्री को शिकायत

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