
सहकारी कानून और मंत्रियों के बीच सद्भाव को खूंटी पर टांग एकतरफा निर्णय ले रहे
सहकार भारत
जयपुर, 12 मई। सहकार से समृद्धि और अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 की बनावटी चकाचौंध के बीच सहकारिता विभाग के कुछ अधिकारी, भजनलाल सरकार के लिये सिरदर्द बनते जा रहे हैं। एक ओर जहां जिम्मेदार सहकारी अफसरों की लापरवाही के कारण 25 लाख किसानों के बीमा की फाइल सहकारिता रजिस्ट्रार के कार्यालय में धूूूल फांक रही है, वहीं दूसरी ओर एक सहकारी अफसर ने अपने कारनामों से प्रदेश की भाजपा सरकार के दो मंत्रियों को आपस में लड़वाने की बुनियाद तैयार कर दी है। ऐसा एक मामला हाल ही में सीकर जिले में सामने आया। सीकर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक भंवर सुरेंद्र सिंह के एक असहकारी कृत्य के कारण सहकारिता मंत्री गौतम दक और यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बीच मतभेद की गहरी खाई पैदा हो गयी है। भंवर सुरेंद्र द्वारा सहकारी कानून को अपनी सुविधा के अनुरूप परिभाषित करके निर्णय लेने से यूडीएच मंत्री झामर सिंह खर्रा की अपने ही गांव में किरकिरी हो रही है।
जानकारी मिली है कि भंवर सुरेंद्र ने सहकारिता की भावना और सहकारी कानून को दरकिनार कर, खर्रा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की सहकारी सोसाइटी के नियमविरुद्ध प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर लिया और खर्रा के गांव की भारणी ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापक महेंद्र कुमार लील के नांगल नाथूसर ग्राम सेवा सहकारी समिति में स्थानांतरण के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। यह आदेश 25 अप्रेल 2025 को जारी किया गया। महेंद्र कुमार मूलत: नांगल नाथूसर गांव का रहने वाला है और पूर्व में, भारणी ग्राम सेवा सहकारी समिति में व्यवस्थापक के पद पर कार्यरत था।
सीकर केंद्रीय सहकारी बैंक की श्रीमाधोपुर शाखा से सम्बद्ध भारणी ग्राम सेवा सहकारी समिति, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के गांव की ही सोसाइटी है। वे और उनके परिवार के सदस्य इस सोसाइटी के ऋणी सदस्य हैं। भारणी के व्यवस्थापक महेंद्र कुमार लील और नांगल नाथूसर ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापक अरुण कुमार का, दोनों समितियों के सहमति प्रस्ताव के आधार पर दिनांक 21.07.2023 को परस्पर स्थानांतरण किया गया था।
ये है प्रावधान
व्यवस्थापकीय सेवा नियम 2022 (29.07.2022 से लागू) के प्रावधान के अनुसार, एक समिति व्यवस्थापक का किसी दूसरी समिति में स्थानांतरण नहीं किया जा सकता। विशेष परिस्थितियों में संबंधित समितियों के व्यवस्थापकों के स्वयं के आवेदन पर, दोनों समितियों की प्रबंध कार्यकारिणी द्वारा इस आशय का प्रस्ताव पारित किया जायेगा, तदोपरांत वित्तदाता बैंक द्वारा अनुमोदन किये जाने पर व्यवस्थापक का सहमत अवधि हेतु मूल संस्था में लियन रहते हुए, पारस्परित स्थानांतरण हो सकेगा। स्थानांतरण की अवधि के पीएफ, ग्रेच्यूटी, वेतनभत्ता आदि का भुगतान संबंधित समिति, जिसमें व्यवस्थापक द्वारा कार्य किया गया है, से देय होगा।
स्थानांतरण निरस्त करने का प्रावधान ही नहीं
व्यवस्थापकीय सेवा नियम, 2022 में इस प्रकार किये गये परस्पर स्थानांतरण को निरस्त करने का कोई प्रावधान नहीं है। कानून से इतर बात करें तब भी, एक समिति द्वारा स्थानांतरण को निरस्त करने का प्रस्ताव लिया जाकर, उस पर वित्तदाता बैंक द्वारा कियी व्यवस्थापक का परस्पर स्थानांतरण किये जाने का कोई आधार नहीं बनता। यह सामान्य नियम है कि यदि किन्हीं दो समितियों के बीच व्यवस्थापकों का परस्पर स्थानांतरण हुआ है, तो ऐसा स्थानांतरण तभी निरस्त होना चाहिये, जब पुन: इस विषय पर संबंधित सोसाइटियों की प्रबंध कार्यकारणी एकमत हों और सहमति से परस्पर स्थानांतरण को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित करें।
एकतरफा प्रस्ताव पर जारी कर दिया आदेश
सीकर केंद्रीय सहकारी बैंक के ऐरोगेंट मैनेजिंग डायरेक्टर भंवर सुरेंद्र सिंह ने नांगल नाथूसर ग्राम सेवा सहकारी समिति के संचालक मंडल द्वारा 23.04.2025 को पारित प्रस्ताव संख्या 4.1 के आधार पर 21.07.2023 को किये गये परस्पर स्थानांतरण आदेश को एकतरफा कार्यवाही करते हुए निरस्त कर दिया। समिति ने प्रस्ताव पारित किया था कि महेंद्र कुमार लील पुत्र मुरली धर, व्यवस्थापक को नांगल नाथूसर समिति से वापस मूल समिति भारणी में भेजा जाता है।
भंवर सुरेंद्र ने सहकारी कानून के प्रावधानों का अध्ययन किये बिना और नांगल नाथूसर ग्राम सेवा सहकारी समिति द्वारा पारित प्रस्ताव के गुण-दोष का आंकलन किये बिना ही एकतरफा कार्यवाही करते हुए क्रमांक एसकेएसबी/समिति सैल/2025-26/536 दिनांक 25.04.2025 को एक कार्यालय आदेश जारी किया कि नांगल नाथूसर ग्राम सेवा सहकारी समिति लि. के संचालक मंडल के प्रस्तावानुसार महेंद्र कुमार लील व्यवस्थापक को नांगल नाथूसर समिति से वापिस मूल समिति भारणी में भेजे जाने के संचालक मंडल के निर्णय को देखते हुए इस कार्यालय के आदेश क्रमांंक एसबी/प्रशासन/2023-24/3768-69/दिनांक 21.07.2023 द्वारा अरुण कुमार और महेंद्र कुमार लील का मूल समिति में लियन रहते हुए सहमत अवधि के लिए किये गये पारस्परिक स्थानांतरण के अनुमोदन को निरस्त किया जाता है।
नांगल नाथूसर सोसाइटी के अध्यक्ष, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के कट्टर राजनीतिक विरोधी बताये जाते हैं।
भंवर सुरेंद्र के कार्यकाल में हुआ अजमेर बैंक में करोड़ों रुपये का घोटाला
उल्लेखनीय है कि अजमेर की किशनगढ़ ब्रांच में करोड़ों रुपये का गबन भंवर सुरेंद्र सिंह के कार्यकाल में ही हुआ था। गबन की पूरी अवधि में वे अजमेर केंद्रीय सहकारी बैंक में प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत रहे। सहकारिता रजिस्ट्रार के स्पष्ट आदेश और मनाही के बावजूद, भंवर सुरेंद्र के कार्यकाल में, 65 साल से अधिक आयु वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बैंक से नहीं हटाया गया, उल्टे भंवर सुरेंद्र की अनुशंषा पर, अपेक्स बैंक द्वारा 65 साल से अधिक आयु वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आईडी बनायी गयी। ऐसे ही एक वृद्ध कर्मचारी की आईडी के कारण किशनगढ़ ब्रांच में 4 करोड़ रुपये से अधिक राशि का गबन हुआ। सरकार ने पर्यवेक्षणीय लापरवाही के लिए भंवर सुरेंद्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करना तो दूर, उल्टे उसे अजमेर से तीन गुणा अधिक टर्नओवर वाले सीकर केंद्रीय सहकारी बैंक में प्रबंध निदेशक बना दिया।






