
आइये आज आप राजस्थान के बड़बोले सहकारिता मंत्री गौतम दक से मिलाते हैं, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और दागी अफसरों को फील्ड पोस्टिंग नहीं देने जैसे बड़ी-बड़ी डींगे तो हांकते हैं, परंतु जिस बिल्डिंग में को-ऑपरेटिव एक्ट के मामलों में वे न्यायाधीश के रूप में बिराजते हैं, आज कल वहां का सारा काम काज भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा ट्रेप्ड अफसर को सौंप रखा है। एसीबी की अदालत में केस विचाराधीन होने के कारण ही, 1998 बैच के सहकारी अधिकारी ललित मीणा का उप रजिस्ट्रार का लिफाफा 2013-14 से बंद है। फिर भी, दर्जनों सक्षम एवं काबिल अफसरों के होते भी, गौतम दक ने अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक संजय पाठक की हिमायत पर, ललित मीणा, सहायक रजिस्ट्रार को अपेक्स बैंक में डीजीएम (प्रशासन) के पद पर लगा दिया। इससे पहले, गौतम दक ने ललित मीणा को बाड़मेर में लगा रखा था। सारा सहकारी महकमा जानता है कि संजय पाठक और ललित मीणा लंगोटी यार हैं। दोनों पहले भी राजफैड में काम करते हुए खूब मलाई चाट चुके हैं। बारदाना के वो चर्चित किस्से अब भी राजफैड के गलियारों में सुनने को मिल जाते हैं।
राजफैड की इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की नीयत से ही संजय पाठक, गौतम दक से कहकर अपने प्रिय मित्र ललित मीणा को डीजीएम के रूप में अपेक्स बैंक में लाये। फिर अपेक्स बैंक के महाप्रबंधक पी.के. नाग (अभी निलम्बित) की छवि विलेन के रूप में मंत्री के सामने पेश की और उसे निलम्बित करवा दिया, ताकि महाप्रबंधक के दोनों रिक्त पदों की आड़ में ललित मीणा के लिए अवसर को भुनाया जा सके और अपने मंसूबों को पूरा किया जा सके।

अपेक्स बैंक में महाप्रबंधक के दो पद हैं। महाप्रबंधक (प्रशासन) का पद, स्टेट को-ऑपरेटिव सर्विस के अधिकारी के लिए है, जिसपर इससे पहले संदीप खंडेलवाल कार्यरत थे। महाप्रबंधक का दूसरा पद अपेक्स बैंक के अधिकारी के लिए आरक्षित है, जहां पी.के. नाम पदस्थ थे। खंडेलवाल के तबादले के बाद पाठक ने महाप्रबंधक प्रशासन के पद को जानबूझकर खाली रखवा लिया और फिर पी.के.नाग को चलता कर, अपने हम प्याला मित्र ललित मीणा को महाप्रबंधक प्रशासन के रूप में सारी शक्तियां सौंप दी और एमडी के बाद सबसे ताकतवर अफसर बना दिया।
एक ओर तो गौतम दक ये कहते नहीं अघाते कि उनके कार्यकाल में सबसे अधिक अफसरों पर डिसिप्लेनेरी एक्शन लिया गया है, वहीं, उनकी नाक के नीचे ही (सहकारिता मंत्री की अदालत अपेक्स बैंक की छठी मंजिल पर ही लगती है और अधिकांश समीक्षा बैठकें भी मंत्री और प्रमुख शासन सचिव द्वारा अपेक्स बैंक में ही ली जाती हैं), संजय पाठक ने एसीबी से ट्रेप्ड सहकारी अधिकारी ललित मीणा को अपने बराबर ताकतवर बना लिया। महाप्रबंधक के दोनों पद खाली होने का हवाला देकर, ललित मीणा को महाप्रबंधक (प्रशासन) का अतिरिक्त प्रभार दे दिया। अब अपेक्स बैंक के प्रत्येक सैक्शन की फाइल ललित मीणा के टेबल तक जाती है। संजय पाठक अपने कक्ष में मीणा के साथ घंटों बतियाते हैं, जिस दौरान एक-एक फाइल पर डिस्कस होता है। उसके बाद, मीणा अपने कक्ष में जाकर फाइलों को मार्क करते हैं और टीका-टिप्पणी करते हैं। एमडी के कक्ष में बैठकर ही, बैंक के अधिकारियों को जैंडर बदलने की सलाह भी दी जाती है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अपेक्स बैंक प्रबंधन का कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर कोई भी नियम ललित मीणा पर लागू नहीं होता। ललित ने अपने पदस्थापन से लेकर आज तक कभी बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराई जबकि अपेक्स बैंक में नियुक्त सहकारिता सेवा के अन्य अधिकारियों और बैंक कार्मिकों के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य है। बायोमैट्रिक हाजिरी लगाने में तीन दिन की देरी या चूक होने पर बैंक कार्मिकों की एक सी.एल. कट जाती है, लेकिन चूंकि ललित मीणा को अपने निर्माणाधीन बंगले का विजिट करते हुए बैंक में आना होता है, इसलिए पाठक ने उन्हें यह छूट विशेष रूप से प्रदान कर रखी है।
और भी हैं…
केवल ललित मीणा ही दागी अफसर नहीं हैं, जो गौतम दक के राज में राज्य के सबसे बड़े सहकारी बैंक में राज कर रहे हैं। उनके अलावा, मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र भरतपुर में दीपक को खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार के पद की जिम्मेदारी दे रखी है, जो स्क्रीनिंग मामले में एसीबी की राडार पर हैं। जोधपुर में एक बड़े पद पर ऐसे ही सहकारी अफसर को लगा रखा है, जो एसीबी की राडार पर हैं। पीएलडीबी को डूबाने वाले एक अफसर को कोटा जोन में सहकारी बैंक की कमान सौंप रखी है। मंत्री के खुद के गृह जिले चित्तौडग़ढ़ में कांग्रेस राज के अफसर सहकारी बैंक की कमान संभाले हुए हैं, जिनको लेकर स्वयं भाजपा के लोग ही मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इनके अलावा भी कुछ चार्जशीटेड और एसीबी में नामजद अफसरों को मंत्री ने फील्ड पोस्टिंग दे रखी है और बातें करते हैं भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की।





