गौतम दक का कमाल! आरबीआई और नाबार्ड की गाइडलाइन को दरकिनार कर केंद्रीय सहकारी बैंकों में अपात्र प्रबंध निदेशकों की नियुक्ति

सहकार भारत
बीकानेर, 16 जनवरी। प्रदेश के केंद्रीय सहकारी बैंकों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर आमूल-चूल परिवर्तन करके, भले ही राज्य के सहकारिता मंत्री गौतक दक अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन सत्य यही है कि देश के सबसे बड़े बैंकिंग नियामक संस्थान और सहकारी बैंकों को लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकृत भारतीय रिजर्व बैंक के अतिमहत्वपूर्ण और गंभीर परिपत्र को दरकिनार कर, गौतम दक ने अपेक्स बैंक एवं केंद्रीय सहकारी बैंकों की कमान अपात्र अधिकारियों को सौंप दी है। 15-16 जनवरी 2025 की मध्यरात्रि को जारी की गयी 200 अफसरों की चार विभिन्न तबादला सूची में अपेक्स बैंक में संजय पाठक सहित 22 केंद्रीय सहकारी बैंकों में राजस्थान सहकारिता सेवा के 35 अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया, जिनमें से 22 सहकारी अफसरों को प्रबंध निदेशक और 13 अफसरों को अधिशासी अधिकारी/अतिरिक्त अधिशासी अधिकारी लगाया गया है। सबसे बड़ी बात, इस ट्रांसफर/पोस्टिंग से पहले, एक भी अफसर को केंद्रीय सहकारी बैंक मेें मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर लगाने या हटाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति नहीं ली गयी, जबकि इनमें से अधिकांश अधिकारी वैद्यनाथन समिति की सिफारिशों के अनुरूप नाबार्ड के ‘फिट एंड प्रोपर क्राइटेरिया’ में ही नहीं आते। प्रबंध निदेशक पद के लिए इन अपात्र अफसरों की सूची अपेक्स बैंक के पास हर समय उपलब्ध रहती है। पिछले दिनों, केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों के साथ, अपनी पहली समीक्षा बैठक में सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने भी कहा था कि भविष्य में नाबार्ड के ‘फिट एंड प्रोपर क्राइटेरिया’ के अनुरूप ही केंद्रीय सहकारी बैंकों में प्रबंध निदेशक नियुक्त किये जायेंगे। क्योंकि वे बैठक में अफसरों की योग्यता परख चुकी थी, हालांकि, तबादला सूची देखकर प्रतीत होता है कि मंजू राजपाल का नीतिपूर्ण परामर्श भी सहकारिता मंत्री को अपात्रों की नियुक्ति से रोक नहीं पाया।
सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय ने, कुछ सीनियर ऑफिशियल्स की इस सलाह को भी दरकिनार कर दिया कि अपेक्स बैंक और केंद्रीय सहकारी बैंकों में प्रतिनियुक्ति से पहले, आरबीआई और नाबार्ड की गाइडलाइन के अनुरूप पात्र कोऑपरेटिव ऑफिसर्स का पैनल बनाया जाये, फिर उनसे आवेदन एवं साक्षात्कार लेने के उपरांत, योग्य अधिकारियों की नियुक्ति की पत्रावली आरबीआई को भेजी जाये और नियामक संस्थान की स्वीकृति लेकर ही अपेक्स बैंक एवं केंद्रीय सहकारी बैंकों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी लगाया जाये।
जिन अफसरों को कल देर रात केंद्रीय सहकारी बैंकों की जिम्मेदारी सौंपी गयी हैं, उनमें राज्य के बड़े सहकारी बैंकों में लगाये गये अधिकारी ही ‘फिट एंड प्रोपर क्राइटेरिया’ में नहीं आते। इनमें वासुदेव पालीवाल, प्रबंध निदेशक, बाड़मेर केंद्रीय सहकारी बैंक, भंवर सुरेंद्र सिंह, प्रबंध निदेशक सीकर केंद्रीय सहकारी बैंक, दीपक कुक्कड़, प्रबंध निदेशक, हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक, राजकुमार खांडिया, प्रबंध निदेशक, डूंगरपुर केंद्रीय सहकारी बैंक, परेश पण्डया, प्रबंध निदेशक, बांसवाड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक, पूनाराम चोयल, प्रबंध निदेशक, सिरोही केंद्रीय सहकारी बैंक, जयपाल गोदारा, प्रबंध निदेशक, नागौर केंद्रीय सहकारी बैंक, नारायण सिंह, प्रबंध निदेशक, जालोर केंद्रीय सहकारी बैंक आदि शामिल हैं। ये सब उप रजिस्ट्रार हैं, जबकि केंद्रीय सहकारी बैंक में प्रबंध निदेशक का पद ही संयुक्त रजिस्ट्रार कैडर का है।
इनके अलावा, ज्वाइंट रजिस्ट्रार कैडर के जिन अफसरों को केंद्रीय सहकारी बैंकों की कमान सौंपी गयी है, उनमें बीकानेर सीसीबी के मोहम्मद फारूक, अजमेर सीसीबी के हरीश सिवासिया, दौसा सीसीबी के रोहित सिंह, टोंक सीसीबी के सी.एल. बुनकर भी नाबार्ड के ‘फिट एंड प्रोपर क्राइटेरिया’ में नहीं आते। अपात्र प्रबंध निदेशकों में अलवर के देवीदास बैरवा प्रमुख हैं। बैरवा के पास, वित्त से सम्बंधित कोई एकेडमिक या तकनीकी योग्यता नहीं है और केवल 18 महीने का बैंकिंग का अनुभव है। फिर भी इन्हें यथावत रखा गया है। गंगानगर बैंक में संजय गर्ग, एडिशनल रजिस्ट्रार और झुंझनू बैंक में संदीप शर्मा, उप रजिस्ट्रार को यथावत और पाली से सिरोही केंद्रीय सहकारी बैंक में भेजे गये पूनाराम चोयल, उप रजिस्ट्रार भी ‘फिट एंड प्रोपर क्राइटेरिया’ के मानदंडों की दृष्टि से अपात्र हैं, लेकिन फिर भी इन्हें प्रबंध निदेशक के पद से नवाजे जाने का सिलसिला बरकरार रखा गया।
सूत्रों की मानें तो उपरोक्त 22 सहकारी अफसरों को केंद्रीय सहकारी बैंक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रबंध निदेशक) के पद पर लगाये जाने या कुछेक को एक बैंक से दूसरे बैंक भेजे जाने से पहले आरबीआई की स्वीकृति लेना जरूरी नहीं समझा गया, जबकि सहकारी बैंकों की प्रशासनिक दक्षता एवं वित्तीय सुदृढता से सम्बंधित इस विषय पर आरबीआई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अभी तक, संजय पाठक की अपेक्स बैंक में प्रबंध निदेशक के रूप में प्रतिनियुक्ति को ग्रीन सिग्नल नहीं दिया है। आरबीआई इससे पहले, अपेक्स बैंक में धन सिंह देवल की प्रबंध निदेशक पद पर प्रतिनियुक्ति पर भी ऐतराज जता चुका है। देवल के पश्चात, संजय पाठक को प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया और आरबीआई को सूचित किया गया, तब भी शीर्ष नियामक संस्थान ने ऐतराज जताया था। इसके बाद ही, संजय पाठक की पत्रावली आरबीआई भेजी गयी, हालांकि, तब भी, भारतीय रिजर्व बैंक ने आंख मूंद पर विश्वास करने की बजाय प्रपत्र में वर्णित तकनीकी एवं शैक्षणिक योग्यताओं के दस्तावेजी साक्ष्य तलब कर लिये थे।
एमडी लगाने और हटाने के लिए जरूरी है आरबीआई की मंजूरी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिनांक 23.12.2020 के परिपत्र का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से 02.07.2024 को देश में सभी राज्य सहकारी बैंकों एवं जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को पत्र द्वारा सूचित किया गया है कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35 बी(आई)(बी) के तहत राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति/नियुक्ति की समाप्ति के लिए प्रबंधन को आरबीआई की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य रूप से लेनी होगी। बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 के अधिनियमन के साथ, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35बी (धारा 56 के साथ पढ़ें) में निहित प्रावधान, 23.12.2020 की राजपत्र अधिसूचना के तहत 01.04.2021 से राज्य सहकारी बैंकों और केंद्रीय सहकारी बैंकों पर लागू हो गए हैं। इसलिए, राज्य सहकारी बैंकों और केंद्रीय सहकारी बैंकों को एमडी/सीईओ की नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति/नियुक्ति की समाप्ति के लिए आरबीआई की पूर्व मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक है।
नाबार्ड के अनुसार, आरबीआई ने बीआर एक्ट, 1949 की धारा 35बी(1)(बी) के तहत अनुमोदन मांगने वाले सहकारी बैंकों से प्राप्त आवेदनों को प्रोसेस करना शुरू कर दिया है। नाबार्ड ने आरबीआई की ओर से एक चार पेज का प्रपत्र एवं आवेदन प्रारूप संलग्न कर, समस्त सहकारी बैंकों को प्रेषित किया था, जिसमें एमडी/सीईओ की नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति/नियुक्ति की समाप्ति के लिए पूर्व स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। इस प्रपत्र में एमडी/सीईओ, जिसकी नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन किया गया है, के बारे में पूरा ब्यौरा, यथा-एकेडमिक क्वालिफिकेशन, प्रोफैशनल एक्सपीरियंस (संस्थान एवं अवधि सहित), नियुक्ति/पुनर्नियुक्ति की शर्तें आदि का ब्यौरा देते हुए यह भी बताना होगा कि प्रस्तावित नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (एएसीएस) की धारा 10 के प्रावधानों के अनुपालन में है या नहीं। इसके अलावा सम्बंधित व्यक्ति/अधिकारी ने, पिछले दस में कहां-कहां, कितनी अवधि के लिए कार्य किया, यह जानकारी भी देनी होगी।

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