सहकारी बैंक के मुख्य प्रबंधक की पदोन्नति में धांधली का आरोप, निष्पक्ष जांच व निरस्तीकरण की मांग

सहकार भारत
बीकानेर, 21 सितंबर। हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक (HKSB) में मुख्य प्रबंधक के पद पर हुई संजय शर्मा की पदोन्नति (Promotion)  विवादों के घेरे में आ गई है। बैंक के अधिकांश आदेशों पर हाई कोर्ट से स्थगन लाने वाले संजय शर्मा को साल भर पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ग्राम सेवा सहकारी समितियों में गोदामों की मंजूरी दिलाने की एवज में 8 लाख रूपये की रिश्वत राशि के साथ गिरफ्तार किया था। तब शर्मा को निलम्बित कर दिया गया था, हालांकि वे इसके विरुद्ध अदालत से स्टे ऑर्डर ले आये। जब उनका स्थानांतरण प्रधान कार्यालय से हनुमानगढ़ जंक्शन ब्रांच में किया गया, तब वे हाईकोर्ट से स्टे ले आये। अंतत: बैंक प्रबंधन ने शर्मा को प्रधान कार्यालय से दूर रखने के लिये, उसे डेपुटेशन पर हनुमानगढ़ जंक्शन ब्रांच में लगा रखा है, हालांकि वह दिनभर प्रधान कार्यालय में ही बैठा रहता है।

सहकारिता विभाग के अतिरिक्त रजिस्ट्रार (बैंकिंग) को पत्र भेजकर संजय शर्मा को दी गई पदोन्नति की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितता पाये जाने पर पदोन्नति रद्द करने की मांग की गई है। यह शिकायत राजाराम चाहर द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसमें सितंबर 2024 में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाये गये हैं।

पदोन्नति प्रक्रिया और योग्यता पर उठे सवाल

शिकायत पत्र में पदोन्नति में वरिष्ठता और योग्यता के स्थापित मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाये गये हैं। आरोप है कि वर्ष 2023-24 की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) पूर्ण न होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति का लाभ दिया गया। उपलब्ध मेरिट सूची में सबसे न्यूनतम स्थान होने के बावजूद मुख्य प्रबंधक पद पर पदोन्नत किए जाने से चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

वित्तीय अनियमितता, पेनल्टी और अदालती मामलों को छुपाने का आरोप

शिकायत में बताया गया है कि पदोन्नति के समय संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कई गंभीर मामले लंबित थे:-

1. गोरखना प्रकरण (रूपये 10 लाख से अधिक की अनियमितता) : हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक की गोरखाना शाखा में 10 लाख रूपये से अधिक राशि की वित्तीय अनियमितता मामले में संजय शर्मा को राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम की धारा 55 के तहत दोषी ठहराते हुए आदेश पारित किया गया था, जिसमें अधिकारी ने स्थगन (स्टे) प्राप्त कर रखा है।

2. डीडी प्रकरण (रूपये 2 लाख की शास्ति) : डीडी प्रकरण में 2 लाख रूपये की वित्तीय शास्ति (पेनल्टी) अधिरोपित की गई थी।

3. तीन संतान संबंधी मामला : राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में तीन संतान से संबंधित प्रकरण विचाराधीन (लंबित) है।

4. दो बार निलंबन : संबंधित अधिकारी को विभिन्न प्रकरणों में दो बार निलंबित भी किया जा चुका है।

स्वतंत्र जांच और निरस्तीकरण की मांग

शिकायतकर्ता ने विभाग से मांग की है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि तथ्यों को छुपाकर या पदोन्नति समिति व सक्षम अधिकारी को अपूर्ण या भ्रामक जानकारी देकर पदोन्नति प्राप्त की गई है, तो नियमानुसार उक्त पदोन्नति को तत्काल निरस्त कर आवश्यक वैधानिक व विभागीय कार्रवाई की जाये।

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