
– कृषि सैक्टर में दीर्घकालीन और मध्यकालीन ऋण का प्रवाह बढ़ेगा
सहकार भारत
जयपुर, 22 जुलाई। प्रदेश में दीर्घकालीन एवं मध्यकालीन अवधिपार ऋण की वसूली के लिए राज्य सरकार के वित्तीय सहयोग से लागू की गयी मुख्यमंत्री ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना (सीएम-ओटीएस) ने प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों को जीवनदान दे दिया है। सरकार की इस योजना से भूमि विकास बैंकों द्वारा 360 करोड़ रुपये से अधिक राशि का अवधिपार ऋण वसूल किया गया। इससे राज्य के 36 में से 27 बैंक लाभ की स्थिति में जा आयेंगे। इससे मध्यकालीन और दीर्घकालीन अवधि के कृषि ऋण का प्रवाह बढ़ेगा।
शासन सचिव (सहकारिता) डॉ. समित शर्मा ने सोमवार को शासन सचिवालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के द्वारा प्रदेश की 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के व्यवसाय, विभागीय योजनाओं की प्रगति, कम्प्यूटराइजेशन, कार्यस्थल पर कार्मिकों की उपस्थिति आदि की समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा किसानों को मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना 2025-26 के माध्यम से ऋणियों को 200 करोड़ रुपये से अधिक राशि की ब्याज राहत दी गयी, जिसके फलस्वरूप भूमि विकास बैंकों की वित्तीय स्थिति पर सकारात्मक रूप से पड़ा है। पिछले वर्ष तक मात्र 10 बैंक की लाभ की स्थिति में थे और अब लाभ में आने वाले बैंकों की संख्या 27 हो जायेगी। इस वर्ष में शेष 9 बैंकों को भी लाभ में लाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि बैंकों की वित्तीय स्थिति अच्छी होने से किसानों को कृषि संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये अधिक मात्रा में मध्यकालीन ऋण दिये जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 की अवधि में विगत वर्ष से दोगुना से अधिक ऋणों का वितरण किया गया है। भूमि विकास बैंकों की कार्यप्रणाली को डिजिटाइज्ड कर पारदर्शिता स्थापित करने के लिये युद्धस्तर पर उनका कम्प्यूटराइजेशन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने भीलवाडा, केकडी, भरतपुर, बांसवाडा, उदयपुर एवं प्रतापगढ स्थित बैंकों के कम्प्यूटराइजेशन के कार्य की प्रगति को सराहते हुये जैसलमेर, रायसिंहनगर, जयपुर, नागौर, जालौर, झालावाड, कोटा, बीकानेर, जोधपुर, बारां एवं सवाईमाधोपुर बैंकों को नसीहत दी और कहा कि वे अपनी अपनी बैंकों में कम्प्यूटराइजेशन के काम जैसे-एफएचआर, एफवीआर, डीसीटी और ऑन् बोर्डिंग कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिये डेडिकेटेड नोडल अधिकारी की नियुक्ति करें ताकि वे इस मुहीम में पिछडे नहीं।
शासन सचिव ने कहा कि बैंकों के कम्प्यूटराइजेशन से कार्मिकों के कामकाज में पारदर्शिता आयेगी एवं किसानों को बेहतर सेवायें मिल सकेंगी। सहकारी बैंकों की कामकाज की समीक्षा विभाग द्वारा जारी ”18 की परफोरमेंस इण्डीकेटर्स” के आधार पर की गई। केपीआई के अनुसार मासिक समीक्षा में चित्तोडगढ बैंक 89.93 अंक के साथ प्रथम स्थान पर रहा, 82.98 अंक लेकर बालोतरा दूसरे स्थान पर तथा प्रतापगढ 82.47 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। उदयपुर, पाली, जालौर और सवाईमाधोपुर बैंकों का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा।
डॉ. शर्मा ने कहा कि बैंकों का मुख्य कार्य किसानों को ऋण मुहैया कराना है लेकिन ऋण को निर्धारित समय पर वसूल करना उससे अधिक महत्वपूर्ण है। किसी भी बैंक की वित्तीय स्थिति ऋण वसूली से निर्धारित होती है। इसलिये बैंकों के मूल्यांकन के लिये निर्धारित केपीआई बिन्दुओं में ऋण वितरण कार्य को 8 अंक तथा वसूली कार्य को 50 अंक दिये गये हैं। बैंकों के कम्प्यूटराइजेषन से उनकी कार्यशैली एवं कार्य निष्पादन में वृद्धि होती है और वे त्वरित सेवाऐं देने के लिये तैयार होते है। इसलिये कम्प्यूटराइजेशन कार्य को पूरा करने के लिये 20 अंकों का निर्धारण किया गया है।
उन्होंने बताया कि बैंक में लेखांकन, उसका ऑडिट एवं आमसभा के आयोजन के लिये 16 अंक, राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक द्वारा निर्धारित वित्तीय अनुशासन की पालना के लिये 5 अंक तथा सम्पर्क पोर्टल व न्यायिक प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिये 5 अंक निर्धारित किये गये हैं। उन्होंने सभी बैंकों के सचिवों को कहा कि वे अपने स्टाफ के साथ जुटकर काम करें और बैंक को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये तैयार करें। उन्होंने कहा कि सभी बैंक इस प्रकार कार्य करें की उनका प्रदर्शन आउटस्टेण्डिग हो। उन्होंने समीक्षा के दौरान कार्मिकों की कार्यस्थल पर कार्यालय समय में उपस्थिति, किसानों के साथ मृदुव्यवहार के साथ बैंकिंग सेवाओं का त्वरित निष्पादन तथा किसानों का बैंक के प्रति विश्वास में बढोतरी करने पर विशेष रूप से जोर दिया।






