हनुमान राजावत ने महिपालसिंह दवेला और हेमंत व्यास को बर्खास्त कर दिया

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राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसाइटी कर्मचारी यूनियन में उठापटक शुरू

सहकार भारत

बीकानेर, 3 मई। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आंदोलन के विस्तार की चर्चा के बीच, अचानक और अकारण आंदोलन स्थगित किये जाने के रुझान आने शुरू हो गयेे हैं। इस आंदोलन रूपी नाव को बीच मझधार में छोडऩे का जबरदस्त विरोध कर रहे, सहकारी समिति कर्मचारियों के दो बड़़े और कर्मठ नेताओं – महिपालसिंह दवेला (बांसवाड़ा) और हेमंत व्यास (डूंगरपुर) को, उनके मूल संगठन – राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसाइटी कर्मचारी यूनियन से दूध से मक्खी की तरह निकाल कर बाहर फेंक दिया गया है।

महिपालसिंह दवेला, बांसवाड़ा

 

हेमंत व्यास, डूंगरपुर

सहकार भारत ने 20 अप्रेल 2026 को ही यह बता दिया था कि अगले दिन यानी 21 अप्रेल 2026 को सहकारी सोसाइटी कर्मचारियों का आंदोलन समाप्त हो जायेगा और ऐसा ही हुआ, हालांकि, इसे समाप्त नहीं कहकर, स्थगित नाम दिया गया। तब, हेमंत व्यास द्वारा इस समाचार को गलत बताते हुए इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी गयी थी, हालांकि एक दिन बाद वही हुआ, जो होना, एक दिन पहले तय हो चुका था। व्यास और दवेला तब से ही सोशल मीडिया पर आंदोलन समाप्त करने को लेकर मुखर विरोध कर रहे थे और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इन पर गाज गिरने वाली है, हालांकि, स्थिति को भांपते हुए व्यास ने पहले ही सोशल मीडिया पर ऐलान कर दिया था कि वो संगठन के तमाम पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।

बहरहाल, अब राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसाइटी कर्मचारी यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष हनुमानसिंह राजावत ने अनुशासनहीनता और संगठन विद्रोह के आरोप में दोनों पदाधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। भाषा का लहजा नरम है, इसलिए बर्खास्त के स्थान पर पदच्युत शब्द इस्तेमाल किया गया है, जिसका उर्दू अनुवाद बर्खास्तगी ही होता है।

पद छीने, सदस्यता समाप्त की

राजावत की ओर से सोशल मीडिया पर जारी प्रेस नोट के अनुसार, राजस्थान बहुउद्देशीय सहकारी सोसायटी कर्मचारी यूनियन ने 30 अप्रेल को महत्वपूर्ण फैसला कर, प्रदेश महासचिव महिपालसिंह दवेला और प्रदेश संयोजक एवं प्रवक्ता हेमंत व्यास को पदों और यूनियन की सदस्यता से पदच्युत कर दिया है। प्रेसनोट में इसका कारण अनुशासनहीनता और ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 के नियमों का उल्लंघन बताया गया है। यह भी बताया गया कि दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन इन्होंने कोई संतोषप्रद उत्तर नहीं दिया।

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