ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों का आंदोलन समाप्ति की ओर…

एक-दो दिन में घोषणा हो जायेगी, केवल 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलने पर राजी होने की संभावना

सहकार भारत

बीकानेर, 19 अप्रेल। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले, चार प्रमुख मांगों को लेकर लगभग दो माह पहले शुरू हुआ ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों का प्रदेश व्यापी आंदोलन समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। एक और जहां हालिया दो-तीन दिन में, शेष बचे जिलों में आंदोलन विस्तार लेने लगा था, वहीं दूसरी ओर आंदोलन का नेतृत्व कर रही संघर्ष समिति हांफने लगी है। राज्य सरकार और सहकारिता विभाग ने आंदोलन को कोई तवज्जो नहीं दी, जिसके चलते उम्मीद है कि मंगलवार को आंदोलन समाप्ति की घोषणा हो जायेगी। संघर्ष समिति के नेता दबाव में हैं अथवा जिस स्वार्थपूर्ति को लेकर वे आंदोलन के पथ पर चले थे, वो पूर्ण हो गया है, ये कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन प्रबल संभावना यही है कि 20 अप्रेल 2026 को आंदोलन समाप्ति की घोषणा कर दी जायेगी।

इस आंदोलन को सबसे बड़ा समर्थन भीलवाड़ा जिले से मिला, जहां के सहकारी कर्मचारी नेता सत्यनारायण तिवारी, भीलवाड़ा सेंट्रल कोऑपेरटिव बैंक के प्रबंध निदेशक के बहुत खास बताये जाते हैं। किसी व्यवस्थापक का बैंक के प्रबंध निदेशक के लिए खास होना क्या महत्व और पोजिशन रखता है, और ये खास लोग क्या करते हैं, ये सभी सहकारी अधिकारी और सहकारी समिति कर्मचारी भलि-भांति जानते हैं। 27 फरवरी 2026 को जब सहकारी समिति कर्मचारियों द्वारा नेहरू सहकार भवन, जयपुर के समक्ष अब तक का सबसे बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया था, तब उसमें आधी संख्या केवल भीलवाड़ा जिले से थी। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस दावे के साक्ष्य उपलब्ध हैं।

फिलहाल, सोमवार को अपेक्स बैंक, जयपुर में आयोजित दोनों पक्षों की वार्ता में सहकारी प्रशासन ने संयुक्त संघर्ष समिति को दो टूक शब्दों में बता दिया कि यदि आंदोलन अविलम्ब समाप्त नहीं हुआ, तो सभी सक्रिय कर्मचारी नेताओं की सोसाइटियों पर शिकंजा कसा जायेगा। इनमें विशेष ऑडिट, विशेष निरीक्षण, स्क्रीनिंग की जांच भी शामिल है।

ब्याज अनुदान पर सहमति होने की चर्चा

विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि सहकारी प्रशासन की इस घुडक़ी के बाद, संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कुछ तो दीजिये की दुहाई लगायी है। उम्मीद है कि कल, राज्य सरकार के हिस्से का 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिल जायेगा और इसी भरी हुई झोली के साथ और कुछ आश्वासनों, वादों के शब्दजाल के साथ आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी जायेगी। फिर सबको, खरीफ-2025 सीजन की ऋण वसूली के काम में लगा दिया जायेगा, जिसकी अंतिम तिथि सरकार ने बढ़ाकर 15 मई 2026 कर दी है। अब केवल यही देखना है कि संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी, अपने हजारों आक्रोषित सहयोगियों को मनाने और खुद की खाल बचाने के लिए रातभर में क्या पटकथा तैयार करते हैं।

पैक्स कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगें

1. ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों का जिला कैडर बनाया जाये।

2. केंद्रीय सहकारी बैंकों में ऋण पर्यवेक्षक के शत-प्रतिशत पद व्यवस्थापकों की पदोन्नति से भरे जायें।

3. 10 जुलाई 2017 से पहले पैक्स में कार्यरत एवं स्क्रीनिंग से वंचित ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों के नियमितिकरण की अनुशंसा के लिए स्क्रीनिंग प्रक्रिया पुन: शुरू की जाये।

4. ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों के सेवानियम 2022 को संशोधित करते हुए, सेवानियम कार्मिक विभाग द्वारा बनाये जायें।

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