जैसलमेर, 17 अप्रेल। जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में किसानों के 70 लाख रुपये के क्लेम हड़पने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) जगदीश सुथार और पूर्व कैशियर विवेक सैन को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में आरोपी व्यवस्थापक नरेश कुमार को पुलिस पहले ही पकड़ चुकी है। जांच में सामने आया है कि यह घोटाला पद से हटाए गए व्यवस्थापक और ब्रांच मैनेजर की मिलीभगत से किया गया था। क्लेम की राशि को सोसाइटी के मुख्य अकाउंट में डालने के बजाय चांधन ब्रांच में ट्रांसफर किया गया, और फिर किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर करने के बजाय उसे अवैध रूप से निकाल कर हड़प लिया गया।
मुख्य आरोपी और उनकी वर्तमान स्थिति
•जगदीश सुथार (पूर्व एमडी): वर्तमान में बाड़मेर में उप रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं। गिरफ्तार।
•विवेक सैन (पूर्व कैशियर): वर्तमान में मोहनगढ़ को-ऑपरेटिव मैनेजर हैं। गिरफ्तार।
•नरेश कुमार (पूर्व व्यवस्थापक): मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं और जमानत पर हैं।
•अश्विनी केवलिया (चांधन ब्रांच मैनेजर): अभी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
घोटाले का सिलसिलेवार घटनाक्रम
2020 में फर्जी हस्ताक्षर से घोटाले की शुरुआत
एएसपी रेवंतदान ने बताया कि साल 2020 में कनोई ग्राम सेवा सहकारी समिति में करीब 70 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया था। समिति के अध्यक्ष रोजे खान ने आरोप लगाया था कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक से बड़ी राशि निकाली गई। जांच में खुलासा हुआ कि तत्कालीन एमडी जगदीश सुथार और समिति के व्यवस्थापक नरेश कुमार ने मिलीभगत कर 70 किसानों के कृषि क्लेम की राशि को आपस में बांट लिया।
व्यवस्थापक को हटाने के बाद भी भुगतान जारी
समिति के अध्यक्ष रोजे खान ने गड़बड़ी की आशंका के चलते 30 अगस्त 2020 को व्यवस्थापक नरेश कुमार को पद से हटा दिया था। इसकी सूचना लिखित और मौखिक रूप से जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी जगदीश सुथार को दी गई थी। इसके बावजूद, एमडी ने नियमों को ताक पर रखते हुए कार्यमुक्त किए जा चुके व्यवस्थापक के साथ मिलकर 8 सितंबर को 20 लाख रुपये और 25 सितंबर को 50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
70 लाख रुपये का दो किस्तों में अनियमित भुगतान
घोटाले के तहत कुल 70 लाख रुपये की राशि का भुगतान दो किस्तों में किया गया:
तिथि | राशि |
8 सितंबर 2020 | 20 लाख रुपये |
25 सितंबर 2020 | 50 लाख रुपये |
इस तरह पूरी राशि का निपटारा नियमों के विपरीत तरीके से किया गया।
मुख्य खाते की जगह दूसरी ब्रांच से लेनदेन
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कनोई सोसाइटी का मुख्य खाता जैसलमेर शाखा में था, लेकिन षड्यंत्र के तहत भुगतान चांधन ब्रांच से किया गया। इसके साथ ही, राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद किसानों के कृषि क्लेम की राशि सीधे उनके ऑनलाइन खातों में ट्रांसफर नहीं की गई और अनियमित तरीके से भुगतान किया गया।
जांच में चार अधिकारी दोषी
राजस्थान को-ऑपरेटिव एक्ट की धारा 55 और 57 के तहत हुई जांच में तत्कालीन एमडी जगदीश सुथार, व्यवस्थापक नरेश कुमार, चांधन ब्रांच मैनेजर अश्विनी केवलिया और कैशियर विवेक सैन को दोषी पाया गया। मामले में नरेश कुमार पहले से जमानत पर है, जबकि शुक्रवार को जगदीश सुथार और विवेक सैन को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है और अश्विनी केवलिया की तलाश जारी है।
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