उप रजिस्ट्रार ने सी.ए. और विभागीय ऑडिटर की ऑडिट को विश्वसनीय नहीं माना, 42 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता मामले में व्यवस्थापक को दी राहत

– 74 आरबी ग्राम सेवा सहकारी समिति में 42 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता मामले में व्यवस्थापक मंदीपसिंह को अभयदान
– उप रजिस्ट्रार न्यायालय ने चार्टर्ड एकाउंटेंट और विभागीय ऑडिटर द्वारा की गयी ऑडिट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाये
– केंद्रीय सहकारी बैंक की अंडर एक्ट जांच रिपोर्ट, एमडी द्वारा जारी जांच परिणाम और धारा 57(2) की जांच से अलग निर्णय सुनाया

सहकार भारत

बीकानेर, 19 अप्रेल। बीकानेर खंड में ऑडिट और सहकारी कानून के प्रकांड विद्वान माने जाने वाले दो सीनियर कोऑपरेटिव ऑफिशियल्स (राजेश टाक, खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार और रणवीरसिंह, क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी) की उपस्थिति में बीकानेर संभाग में सहकारी संस्थाओं, विशेषकर ग्राम सेवा सहकारी समितियों की ऑडिट की गुणवत्ता पर, विभाग के अधिकारी ही सवाल उठाने लगे हैं। न्यायालय, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, श्रीगंगानगर दीपक कुक्कड़ ने बीकानेर संभाग के रायसिंहनगर क्षेत्र (जिला श्रीगंगानगर) की एक ग्राम सेवा सहकारी समिति की चार्टर्ड एकाउंटेंट और विभागीय ऑडिटर द्वारा की गयी सांविधिक लेखा परीक्षा (ह्यह्लड्डह्लह्वह्लशह्म्4 ड्डह्वस्रद्बह्ल) को अविश्वसनीय बताया है। यह मामला रायसिंहनगर क्षेत्र की 74 आरबी ग्राम सेवा सहकारी समिति में हुए 42 लाख रुपये  की वित्तीय अनियमितता से संबंधित है।

राजस्थान कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट 2001 की धारा 57(2) के अंतर्गत जांच परिणाम जारी करते हुए, कुक्कड़ ने, हालांकि, सोसाइटी में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जतायी है, तथापि, सी.ए. और विभागीय ऑडिटर द्वारा की गयी स्टेच्यूटरी ऑडिट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए, सोसाइटी की दो साल की विशेष लेखा परीक्षा करवाये जाने की अनुशंषा करते हुए, समिति व्यवस्थापक मंदीप सिंह को तात्कालिक रूप से अभयदान भी दे दिया है।

बैंक ने व्यवस्थापक को 42 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का दोषी माना

विचारणीय प्रश्न यह है कि न्यायालय, उप रजिस्ट्रार द्वारा एक्ट की धारा 57 के तहत जारी जांच परिणाम में, गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा करवायी गयी धारा 55 की जांच रिपोर्ट और बैंक के प्रबंध निदेशक संजय गर्ग, ज्वाइंट रजिस्ट्रार (वर्तमान में अतिरिक्त रजिस्ट्रार) द्वारा जारी जांच परिणाम एवं अनुशंसा पर सवाल खड़े कर दिये हैं। बैंक द्वारा धारा 55 के अंतर्गत करवायी गयी जांच में समिति व्यवस्थापक मंदीप सिंह को लगभग 42 लाख रुपये के गबन का दोषी माना गया था।

गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक संजय गर्ग द्वारा दिनांक 01.10.2025 को धारा 55(5) एवं 55 (6) के अंतर्गत जारी किये गये जांच परिणाम में मनदीपसिंह, व्यवस्थापक को अल्पकालीन ऋण राशि 2695832.33 रुपये, मध्यकालीन ऋण राशि 877650 रुपये, एसटी ऋण राशि 564027.83 रुपये, कुबेर ऋण राशि 55000 रुपये व रोकड़ मिनी बैंक की राशि 5079 रुपये (कुल राशि 4197589.16 रुपये) की वित्तीय अनियमितता करने हेतु दोषी पाये जाने पर मनदीप सिंह के विरूद्ध राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 57 के अन्तर्गत कार्यवाही करने के लिए प्रकरण उप रजिस्ट्रार, श्रीगंगानगर को भेजा गया था।

धारा 57(2)प्रकरण दर्ज करने की अनुशंषा

इसके आधार पर राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 57(1) के अन्तर्गत प्रकरण सं. 08/2025-26 दर्ज कर इस कार्यालय के आदेश क्रमांक 6181-85 दिनांक 08.10.2025 द्वारा राजीव बिश्नोई, निरीक्षक (ऑडिट) सहकारी समितियां श्रीगंगानगर को जांच हेतु जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। राजीव बिश्नोई ने पत्रांक एसपीएल-1 दिनांक 25.11.2025 द्वारा प्रेषित कर मनदीप सिंह, व्यवस्थापक के आचरण को संदिग्ध करार देते हुए 41 लाख 97 हजार 589 रुपये के लिए प्रकरण राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम 2001 की धारा 57(2) में दर्ज करने हेतु अनुशंसा की गयी।

उप रजिस्ट्रार ने ऑॅडिट को विश्वसनीय नहीं माना

न्यायालय, उप रजिस्ट्रार, श्रीगंगानगर ने धारा 55 की जांच, धारा 55 के जांच परिणाम और धारा 57(1) में राजीव बिश्नोई, निरीक्षक (ऑडिट) की जांच रिपोर्ट से इतर निर्णय पारित करते हुए, धारा 57(2) में वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर दिया। वर्ष 2023-25 की ऑडिट चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा की गयी जबकि 2024-25 की सांविधिक लेखा परीक्षा विभागीय ऑडिटर ने की थी।

धारा 57(2) में जारी जांच परिणाम इस प्रकार हैं:-

न्यायालय, उप रजिस्ट्रार, श्रीगंगानगर दीपक कुक्कड़ द्वारा लगभग 42 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता से संबंधित प्रकरण में 18 मार्च 2026 को जारी जांच परिणाम इस प्रकार हैं-

धारा 55 की जांच रिपोर्ट में वर्णित ऑडिट रिपोर्ट 2023-24 के आंकड़े तथा वर्ष 2024-25 की विभागीय निरीक्षक द्वारा की गयी ऑडिट रिपोर्ट में वर्णित आंकड़ों में तारतम्यता एवं सुसंगतता परिलक्षित नहीं होती है जो कि इन दोनों ऑडिट रिपोटर््स की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न करता है। चूंकि धारा 55 की जांच रिपोर्ट अनुसार वर्ष 2015 से ही समिति की बैलेंस शीट में सदस्यों की ओर बकाया ऋण तथा ऑडिट रिपोर्ट में संलग्न बकायादारों की सूची में अंतर चला आ रहा है।

अत: समिति में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, परन्तु वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट में वर्णित आंकड़ों की वैधता का निर्धारण किये बिना आगामी कार्यवाही किया जाना विधिसम्मत प्रतीत नहीं होता। अत: मनदीप सिंह द्वारा बकाया कुबेर ऋण राशि (55 हजार रुपये) तथा बकाया रोकड़ मिनी बैंक राशि (5079 रुपये) जमा करवा दी जाने के कारण इनसे संबंधित बिन्दुओं को संचित करते हुए समिति की गत दो वित्तीय वर्षों 2023-24 एवं 2024-25 की विशेष लेखा परीक्षा करवाया जाना उचित होगा।

इस बाबत विशेष लेखा परीक्षक, सहकारी समितियां, श्रीगंगानगर को नियमानुसार कार्यवाही हेतु प्रकरण प्रेषित किया जावे।

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