
धरतीपुत्रों को 54 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले अफसर को फिर से बीमा टेंडर की जिम्मेदारी
सहकार भारत
जयपुर, 12 मार्च । सहकारिता विभाग में अधिकारियों द्वारा रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां को धोखे में रखकर एवं मिसगाइड करके, दागी अफसरों को मनचाहे पद दिलाने का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। हाल ही में, अनुशासनप्रिय एवं कर्मठ रजिस्ट्रार श्रीमती आनंदी को उन्हीं के कार्यालय के अधिकारियों द्वारा मिसगाइड करके ऐसा ही एक आदेश निकाला गया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। यह आदेश, राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के संबंध में कमेटी के गठन को लेकर है, जिसमें राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के चार्जशीटेट महाप्रबंधक प्रमोद कुमार नाग उर्फ पी.के. नाग को सदस्य सचिव बनाया गया है।
किसानों को पहुंचाया 54.82 करोड़ रुपये नुकसान
दो साल पहले, वर्ष 2023-24 में राज सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना की टेंडर कमेटी में पीके नाग को सदस्य सचिव बनाया गया था। इस मामले में नाग को कुछ समय पहले ही निलम्बित कर, राजस्थान सिविल सर्विसेज रूल 16 के तहत चार्जशीट दी गयी थी, जिसका अभी निस्तारण नहीं हुआ है। संदर्भित साल में श्रीराम लाइफ इन्श्योरेंस कंपनी को टेंडर मिला था। बीमा की शर्त के अनुरूप, कंपनी ने 18 से 60 साल तक आयु वर्ग के किसान से दो लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर 17 रुपये 70 पैसे + जीएसटी, प्रीमियम वसूल किया था, जबकि दो लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर जीएसटी लागू ही नहीं था।
इस मामले की जांच में पाया गया कि श्रीराम लाइफ इन्श्योरेंस कंपनी द्वारा किसानों से बीमा प्रीमियम पर जीएसटी के नाम पर 54 करोड़ 82 लाख रुपये वसूल किये गये। साल 2023-24 में कंपनी द्वारा सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना के नाम पर किसानों से 359 करोड़ 40 लाख रुपये की वसूली की गयी। इससे पहले 2021-22 में इस योजना में, इसी कंपनी को, 2 लाख रुपये तक का ऋण लेने वाले किसानों से बीमा प्रीमियम पर, बिना जीएसटी टेंडर दिया गया था, तब किसानों से 208 करोड़ रुपये प्रीमियम वसूल किया गया। इसके बाद 2024-25 में भी प्रीमियम पर बिना जीएसटी का टेंडर आवंटित हुआ था, जिसमें कंपनी को लगभग 200 करोड़ रुपये प्रीमियम प्राप्त हुआ था।
निलम्बन और 16 सीसीए में चार्जशीट
वर्ष 2023-24 में सहकार जीवन सुरक्षा योजना के टेंडर में गड़बड़ी की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी जांच में पाया कि किसानों से जीएसटी के रूप में 54 करोड़ 82 लाख रुपये गलत ढंग से वसूल किये गये। जांच कमेटी ने टेंडर कमेटी के सदस्यों के बयान के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि सदस्य सचिव के रूप में पीके नाग ने टेंडर कमेटी के सदस्यों से जीएसटी वाली बात छुपायी, जिसके चलते किसानों पर 54.82 करोड़ रुपये का अनावश्यक भार पड़ा। यह राशि आज तक किसानों को नहीं लौटायी गयी।
इस मामले में सहकारिता मंत्री गौतम दक ने कड़ी नाराजगी जतायी थी, जिसके बाद जांच कमेटी के सदस्य और अपेक्स बैंक के तत्कालिन प्रबंध निदेशक संजय पाठक ने महाप्रबंधक पीके नाग को निलम्बित कर, उसे 16 सीसीए में चार्जशीट दी। हालांकि, बाद में संजय पाठक ने ही इस चार्जशीट के पैंडिंग रहते हुए, पीके नाग को बहाल कर दिया। वर्तमान में नाग के पास अपेक्स बैंक के दोनों महाप्रबंधकों के पद का दायित्व है। अपेक्स बैंक में महाप्रबंधक के तीन पद हैं। एक पद सहकारिता सेवा के अधिकारी के लिए आरक्षित है जबकि दो पद अपेक्स बैंक के अधिकारियों की पदोन्नति से भरे जाते हैं। विभागीय महाप्रबंधक का पद, फरवरी 2026 से रिक्त है। जबकि अपेक्स बैंक में बैंक कोटे का महाप्रबंधक का दूसरा पद, पद सृजित किये जाने के बाद से रिक्त है।
बैंकिंग अनुभाग से डील होती है फाइल
जनवरी, 2025 के प्रारंभ में अपेक्स बैंक द्वारा रजिस्ट्रार कार्यालय के बैंकिंग अनुभाग को राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के नये टैंडर कराये जाने के बारे में सूचित करते हुए टेंडर कमेटी के गठन के लिए रिक्वेस्ट भेजी गयी। करीब डेढ़ माह तक यह पत्र बैंकिंग अनुभाग में धूल फांकता रहा। कई रिमांइडर भेजे जाने के पश्चात, अंतत: 16 फरवरी, 2026 को सहकारिता रजिस्ट्रार आनंदी के हस्ताक्षर से एक आदेश जारी कर, कमेटी का गठन किया गया, जिसमें पीके नाग को टेंडर कमेटी का सदस्य सचिव बनाया गया है। जो लोग रजिस्ट्रार आनंदी की ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और कर्मठता से परिचित हैं, वे जानते हैं कि यदि आनंदी मैडम को पीके नाग के कारनामों की जानकारी दी होती तो वे नाग को कमेटी के लिए कभी नामित नहीं करती।
वर्ष 2023-24 में जब पीके नाग को टेंडर कमेटी का सदस्य सचिव बनाया गया था, तब वे बैंक में डीजीएम के पद पर कार्यरत थे। वर्तमान में अपेक्स बैंक में 8 डीजीएम कार्यरत हैं और सहकारिता सेवा के चार अधिकारी डेपुटेशन पर पदस्थ हैं। इनमें कई अफसर पीके नाग से अधिक कर्तव्यनिष्ठ, कार्यकुशल और समर्पण भाव से कार्य करने की भावना रखते हैं, लेकिन रजिस्ट्रार कार्यालय के कतिपय अफसरों ने सुनियोजित ढंग से रजिस्ट्रार को गुमराह कर, फिर से चार्जशीटेड महाप्रबंधक पीके नाग को टेंडर कमेटी में शामिल करवा दिया। ऐसी भी चर्चा है कि सिविल लाइंस के दबाब में सहकारी अधिकारियों द्वारा रजिस्ट्रार से नाग के चार्जशीटेड होने और साल 2023-24 के टेंडर कमेटी के रूप में नाग की किसान विरोधी भूमिका को छुपाया गया।
विभागीय योजनाओं से किसानों को मिली राहत
सहकारी बैंकों द्वारा फसली ऋण लेने वाले किसानों का पहले दो प्रकार का बीमा अनिवार्य रूप से किया जाता था, जिसके टेंडर अपेक्स बैंक के स्तर पर होते हैं। राज सहकार दुर्घटना बीमा योजना में 10 लाख रुपये तक का क्लेम मिलता है। सहकार जीवन सुरक्षा योजना में ऋणी को दी गयी राशि का बीमा कंपनी द्वारा रिस्ककवर किया जाता है। वर्तमान में सहकार जीवन सुरक्षा योजना को बंद कर, केरल राज्य की तर्ज पर राजस्थान सहकारी कृषक रिस्क रिलीफ फंड योजना लागू की गयी है, जिससे किसानों का आर्थिक भार बहुत कम हुआ है।





