
स्वार्थी नेताओं की महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ गया ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों का मजबूत प्रदेशव्यापी आंदोलन
सहकार भारत
बीकानेर, 21 अप्रेल। राजस्थान में ग्राम सेवा सहकारी समिति (पैक्स) कर्मचारियों का एक मजबूत प्रदेशव्यापी आंदोलन एक बार फिर स्वार्थी नेताओं की महत्वाकांक्षा की भेेंट चढ़ गया। सहकार भारत ने 20 अप्रेल 2026 को ही यह बता दिया था कि यह आंदोलन, अगले एक-दो दिन में समाप्त हो जायेगा। यह समाचार प्रसारित होने पर, प्रमुख नेताओं द्वारा धोखे में रखी गयी पैक्स कर्मचारियों की जमात ने और दूसरी पंक्ति के कुछ ऊर्जावान नेताओं ने सहकार भारत को सोशल मीडिया पर जमकर कोसा, गालियां दी, समितियों में नहीं घूसने देने का आह्वान किया और, यहां कि सम्पादक विजयकुमार को फोन करके गालियां देने की बातें होने लगी।
इस आंदोलन में सर्वाधिक सक्रिय और सबसे अधिक मानवश्रम का योगदान देने वाले सत्यनारायण तिवारी, बड़ी-बड़ी फेंकने वाले देवेंद सैदावत, दूसरी पंक्ति के युवा नेता बलदेवराम गेट और कुलदीप जंगम वाली यूनियन के प्रदेश पदाधिकारी रामभगत शर्मा ने नाराजगी जताने के लिए व्हाट्सएप कॉल भी किये, लेकिन चूंकि हमें पता कि इन नादान लोगों को अंदर के षड्यंत्र की जानकारी नहीं है, इसलिए हमने किसी का फोन एटेंड नहीं किया। दोपहर बाद प्रमुख नेताओं की सहकारी अधिकारियों के साथ अपेक्स बैंक में हुई संक्षिप्त वार्ता में आंदोलन समाप्ति करने के लिए सहमति जता दी गयी। जैसे ही ये खबर बाहर आयी, तो प्रदेशभर के पैक्स कर्मियों के विरोध का जुनून सहकार भारत से नेतृत्व करने वाले बड़े नेताओं पर शिफ्ट हो गया। इन नेताओं को कौम का गद्दार और धोखेबाज बतया गया।
जिलाध्यक्षों की भावनाओं के विपरीत, आंदोलन की भ्रूण हत्या से आक्रोषित कुछ पदाधिकारियों ने प्रदेश कार्यकारिणी और जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफे भी दे दिये हैं। सोशल मीडिया पर सहकार भारत को धन्यवाद देने का क्रम भी चला कि पत्रकार जी ने तो पहले ही सचेत कर दिया था, लेकिन हम विश्वास में इतने अंधे हो गये कि उनके संकेत को समझ नहीं पाये।
जो तीन, चार या पांच नेता, एक दिन पहले शासन सचिव को आंदोलन समाप्त करने का वचन देकर आये थे, उनसे पूछा जाना चाहिये कि वे पूरी कौम को विश्वास में लिये बिना, ऐसा क्यों कर आये? उनकी क्या मजबूरी थी? या पूरी कौम का भविष्य दांव पर लगाकर, उनका कौनसा स्वार्थ सिद्ध हो गया?
दरअसल, इस आंदोलन की भ्रूण हत्या करने की पटकथा एक दिन पहले यानी 20 अप्रेल 2026 को ही लिख दी गयी थी। अपेक्स बैंक में वार्ता के उपरांत, सभी मुद्दों पर सहमति हो जाने के उपरांत, पांच प्रमुख नेता अपेक्स बैंक के वाहन में बैठकर, शासन सचिवालय गये, जहां उन्होंने शासन सचिव (सहकारिता) डॉ. समित शर्मा को यह पूर्ण विश्वास दिलाया कि हम यह आंदोलन कल यानी 21 अप्रेल को समाप्त कर देंगे, लेकिन चूंकि हमें अपना दामन बचाना है, इसलिए जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाकर, उनसे राय-मशविरा करने की औपचारिकता तो करनी ही होगी। आंदोलनकारी एक नेता की मानें तो वार्ता करने वालों में जालौर के हनुमानसिंह राजावत, बारां के कुलदीप जंगम, अलवर के देवेंद्र सैदावत और भीलवाड़ा के सत्यनारायण तिवारी व जितेंद्रङ्क्षसह शामिल रहे।
इन प्रमुख नेताओं ने शासन सचिव के साथ हुई इस गोपनीय वार्ता और सहमति को अपने ही साथियों – संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों, तीनों संगठनों के प्रदेश कार्यकारिणी पदाधिकारियों, और जिलाध्यक्षों से छुपाया। तय कार्यक्रम के अनुसार अगले दिन जिलाध्यक्षों की आपातकालीन बैठक बुलायी। बैठक का उद्देश्य आंदोलन को और उग्र एवं विस्तार देने के लिए बताया गया। आंदोलन के अगले चरण में जयपुर में महापड़ाव, भरतपुर से पैदल यात्रा और नागौर से ट्रैक्टर मार्च जैसे बड़ी-बड़ी डींगे हांकी गयी।
नेताओं पर अंधविश्वास करके, कई जिलाध्यक्ष/जिला पदाधिकारी और प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य जयपुर के लिये रवाना हो गये। प्रफुल्लित मन के साथ, सोशल मीडिया पर अपनी रवानगी की तस्वीरें शेयर की गयी। बैठक हुई, तय हुआ कि आंदोलन समाप्त नहीं करेंंगे, लेकिन वार्ता के लिए अपेक्स बैंक एमडी के चेम्बर में पहुंचे जालौर के हनुमानसिंह राजावत, बारां के कुलदीप जंगम, फलौदी के नारायणसिंह और झुझुनूं के रामसिंह समझौते के लिये राजी हो गये। सहमति पत्र पर हनुमानसिंह, कुलदीप जंगम और मदन मेनारिया के स्थान पर नारायणसिंह अथवा रामसिंह हस्ताक्षर कर, आंदोलन समाप्त कर आये। (हालांकि, पैक्स कार्मिकों की दूसरी पंक्ति के एक नेता का कहना है कि सहमति वार्ता में नारायण सिंह या रामसिंह की कोई भूमिका नहीं है, ये तो केवल फोटो खिंचवाने के लिए राजावत और जंगम के साथ अपेक्स बैंक एमडी के चेम्बर में गये थे)
इस प्रकार, 50 दिन चला एक बेहद मजबूत आंदोलन, जिसमें सरकार पर दबाव बनना शुरू हो चुका था, और जिससे पैक्स कर्मचारियों के लिए अच्छे दिनों की शुरूआत हो सकती थी, एक सुखद मुकाम पर पहुंचने से पहले ही हादसे का शिकार हो गया।
ग्राम सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों का आंदोलन समाप्ति की ओर…




