
जांच अधिकारी ने अध्यक्ष के कर्तव्यों की चूक पर चुप्पी साधी, 50 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के लिए व्यवस्थापक पर मढ़ा सारा दोष
सहकार भारत
बीकानेर, 16 अप्रेल। गबन/वित्तीय अनियमितताओं से बर्बाद हो रही सहकारी सोसाइटियों को बचाने और दोषियों को दंडित करने के एक व्हीसल ब्लोअर के प्रयास फिर से विफल हो गये हैं। रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां राजस्थान के निर्देश पर राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम की धारा 55 के अंतर्गत करायी गयी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। जांच अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में सारा दोष व्यवस्थापक पर मढ़ दिया है जबकि ग्राम सेवा सहकारी समिति के आदर्श उपनियमों के आलोक में सोसाइटी अध्यक्ष की घोर विफलता के प्रति आंखे मूंद लीं।
शिकायतकर्ता, विजय कुमार निवासी बीकानेर द्वारा सोसाइटी की 9 साल की वैधानिक अंकेक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तुत शिकायत के आंकड़ों को झुठलाते हुए, जांच अधिकारी ने अपने स्तर पर ही नया फार्मूला इजाद कर लिया और 92 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता/गबन के आरोपों से सोसाइटी कार्मिकों और ग्राम सेवा सहकारी समिति के उप नियमों के तहत संचालक मंडल और सोसाइटी अध्यक्ष को, उनके मूल एवं वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने के बावजूद, बाइज्जत बरी कर दिया।
यह मामला दि गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड, श्रीगंगानगर की श्रीकरणपुर शाखा के अंतर्गत संचालित 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति लिमिटेड का है, जिसके अध्यक्ष लखविंद्र सिंह बराड़ हैं, जो पिछले 25 वर्ष से लगातार समिति अध्यक्ष निर्वाचित हो रहे हैं और अब राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लि., जयपुर का अध्यक्ष बनने का ख्वाब संजोये बैठे हैं। कॉनफेड का चुनाव करवाने के लिए बराड़ ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में सहकारिता विभाग के शासन सचिव और रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के विरुद्ध अवमानना याचिका भी दायर कर रखी है। अभी यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जांच में कुछ अन्य बिन्दूओं पर 50 लाख रुपये से अधिक वित्तीय अनियमिताएं उजागर हुई हैं, जिनका जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, परंतु इसके लिए पूरी जिम्मेदारी केवल समिति व्यवस्थापक पर डाली गयी है।
7 साल से बैंक निरीक्षण नहीं करवा सका
वित्त दाता बैंक – दि गंगानगर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड, पिछले लगातार 7 वर्ष से 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति का बैंक स्तर पर किया जाने वाला निरीक्षण करवाने में विफल रहा है। जबकि व्यक्तिगत रूप से, बैंक स्टाफ के अलावा, सोसाइटी अध्यक्ष लखविंद्र सिंह बराड़ का ही बैंक के प्रधान कार्यालय में सबसे अधिक आना-जाना लगा रहता है। सोसाइटी के लगातार 7 साल तक निरीक्षण नहीं करवाने के बावजूद, इस अवधि में 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति को 500 एमटी, 250 एमटी, 100 एमटी के गोदाम और कस्टमर हायरिंग सेंटर देने में बैंक ने कभी गुरेज नहीं किया।
अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर सका संचालक मंडल
ग्राम सेवा सहकारी समिति के आदर्श उप नियम के खंड ‘संचालक मंडल के कर्तव्य’ के अंतर्गत बिन्दू संख्या 1(ञ) में यह स्पष्ट वर्णित है कि संस्था के अंकेक्षण एवं निरीक्षण प्रतिवेदनों पर विचार करना, पूर्ति रिपोर्ट तैयार करना एवं आमसभा के समक्ष अनुमोदन एवं स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करना, इत्यादि संचालक मंडल का कर्तव्य है। वर्ष 2018 के बाद से साल 2024 तक सोसाइटी का बैंक स्तर से एक बार भी निरीक्षण नहीं हुआ। संचालक मंडल ने अपने कर्तव्य के पालन में, 7 साल तक भयंकर चूक करते हुए निरीक्षण से पल्ला झाड़े रखा। लगातार 7 वर्ष तक निरीक्षण प्रतिवेदन पर विचार, पूर्ति रिपोर्ट, आमसभा के समक्ष अनुमोदन एवं स्वीकृति में विफल रहने के बावजूद, जांच अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में संचालक मंडल की कर्तव्यहीनता पर कोई टिप्पणी अंकित नहीं की। संचालक मंडल, गलत ऑडिट रिपोर्ट को आमसभा में अनुमोदन के प्रस्तुत करने और स्वीकृत कराने का भी दोषी है क्योंकि सी.ए. द्वारा अपनी ऑडिट रिपोर्ट में दो साल तक लाभ के गलत आंकड़े पेश किये जाते रहे, लेकिन इस पर न तो संचालक मंडल ने गौर किया, न ही वैधानिक अंकेक्षण करने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट ने, फिर भी जांच रिपोर्ट में संचालक मंडल और चार्टर्ड एकाउंटेंट का उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं किया गया।
अध्यक्षों के कर्तव्यों में भारी चूक
इसी प्रकार, ग्राम सेवा सहकारी समिति के ‘अध्यक्ष के कर्तव्य’ खंड में बिन्दू संख्या (छ) के अनुसार, सोसाइटी अध्यक्ष को प्रत्येक सप्ताह में एक बार संस्था की रोकड़ बही एवं कैश, को चेक करके हस्ताक्षर करना तथा प्रत्येक त्रैमास में कम से कम एक संस्था के स्टाफ की चैकिंग करना तथा हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। समिति में 9 साल में 92 लाख रुपये के वित्तीय अनियमितता की शिकायत हुई और लेखापुस्तकों को मनचाहे ढंग से लिखा गया, संस्था की नगद बिक्री का लंबे समय तक निजी हित में उपयोग करने के उपरांत, अतिविलंब से बैंक खाते में जमा कराया गया।
‘अध्यक्ष के कर्तव्य’ खंड के बिन्दू संख्या 1(घ) के अनुसार, अध्यक्ष का दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करेगा कि व्यवस्थापक संचालक मंडल के निर्देशों एवं संस्था के उद्देश्यों के अनुसार कार्य कर रहा है। लेकिन बराड़ अपने इस कर्तव्य में चूक कर गये और व्यवस्थापक से सही ढंग्र से सोसाइटी हित में काम लेने में विफल रहे। इसी प्रकार, बिन्दू संख्या 1(झ) के अनुसार, व्यवस्थापक द्वारा किये गये कार्यों को चैक करना तथा संचालक मंडल को अगवत कराना, भी अध्यक्ष का दायित्व था, लेकिन वे इसके निर्वहन में विफल रहे। हालांकि, अध्यक्ष की इन विफलताओं को लेकर जांच रिपोर्ट में कोई टिप्पणी नहीं है।
कैश में गड़बड़ तो अध्यक्ष दोषी क्यों नहीं
जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि समिति व्यवस्थापक द्वारा कैश इन हैंड राशि निर्धारित सीमा से अधिक रखी गई। दिनांक 15.10.2015 से 28.03.2024 तक निर्धारित सीमा से अधिक राशि कैश में रखने से सोसाइटी को 13 लाख 57 हजार 886 रुपये ब्याज का नुकसान आंकलित किया गया है, लेकिन इसके लिए केवल व्यवस्थापक को दोषी ठहराते गया है जबकि सोसाइटी के उपनियम के अनुरूप, अध्यक्ष द्वारा प्रति सप्ताह कैश बुक चेक करके हस्ताक्षर करने होते हैं, यदि अध्यक्ष ने ऐसा नहीं किया तो इस वित्तीय नुकसान के लिए अध्यक्ष भी बराबर का दोषी माना जाना चाहिये था, परंतु जांच अधिकारी ने अध्यक्ष के कर्तव्यों की चूक को लेकर कोई उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं किया।
दु:खद पहलू यह है कि, शिकायतकर्ता द्वारा जिस ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों के आधार पर 9 साल में 92 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता/गबन को आरोपित किया गया था, जांच अधिकारी ने उसे पूरी तरह नकार दिया। यहां जांच अधिकारी ने अपनी ओर से कुछ बिन्दुओं को लेनदारी और देनदारी में वर्णित किया गया, लेकिन जांच अधिकारी ने ऐसा किस आधार पर किया अर्थात इसके लिए नाबार्ड/वित्तदाता बैंक/रजिस्ट्रार कार्यालय के किस परिपत्र/पत्र/आदेश को आधार बनाया गया, उसका उल्लेख नहीं किया गया।
जांच अधिकारी का अध्यक्ष ने गहरा नाता
उल्लेखनीय है कि जांच अधिकारी चंद्रशेखर मुडासिया, निरीक्षक (ऑडिट), 4 ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष लखविंद्र सिंह बराड़ (लखियां) के नेतृत्व वाली श्रीकरणपुर क्रय विक्रय सहकारी समिति में मुख्य व्यवस्थापक रह चुके हैं। वे गंगानगर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार के भी लगातार तीन साल तक कार्यवाहक महाप्रबंधक रहे हैं, जहां लखविंद्र सिंह संचालक मंडल का सदस्य है। चंद्रशेखर को ही, 4-ओ ग्राम सेवा सहकारी समिति की ऑडिट आवंटित है। इसके साथ ही, जिला सहकार संघ, श्रीगंगानगर, जिसके हाल में चुनाव सम्पन्न हुए हैं और जिसमें लखविंद्र सिंह बराड़, निर्विरोध संचालक मंडल सदस्य चुने गये हैं, उसके महाप्रबंधक भी चंद्रशेखर ही हैं। गंगानगर जिले में लगभग 700 प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां, 342 ग्राम सेवा सहकारी समितियां, 18 क्रय विक्रय सहकारी समितियां, 2 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक, एक जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार, दर्जनों प्राथमिक सहकारी भंडार, अनेक अन्य सहकारी समितियां (जिन सब में निर्वाचित संचालक मंडल कार्यरत हैं) और सहकारी बैंकों के लगभग 1 लाख 50 हजार ऋणी किसान सदस्य हैं, वहां मात्र 24 सदस्यों वाले जिला सहकार संघ, श्रीगंगानगर के चुनाव मार्च, 2026 में ही सम्पन्न कराये गये हैं।
तीन बार जांच रिपोर्ट लौटायी
खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार कार्यालय के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर उप रजिस्ट्रार, दीपक कुक्कड़ द्वारा 23 सितम्बर 2025 को जांच, चंद्रशेखर मुडासिया, निरीक्षक (ऑडिट) कार्यालय, विशेष लेखा परीक्षक, श्रीीगंगानगर को सौंपी गयी। जांच में तीन बिन्दू शामिल किये गये –
1. वर्ष 2015-16 से वर्ष 2023-24 तक समिति में असंतुलन की स्थिति, असंतुलन के कारणों की जांच, असंतुलन की राशि का उपयोग कहां किया गया एवं इसके लिए उत्तरदायित्व निर्धारण।
2. वर्ष 2015-16 से वर्ष 2023-24 के मध्य चालू खाते में अधिक राशि रखने के कारण एवं इससे समिति को हुई हानि की जांच।
3. वर्ष 2015-16 से वर्ष 2023-24 तक किए गए समिति के निरीक्षणों की स्थिति।
चंद्रशेखर द्वारा 22 दिसम्बर 2025 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी, जांच रिपोर्ट में कमियों के कारण, इसे उप रजिस्ट्रार द्वारा तीन बार लौटाते हुए स्पष्ट टिप्पणी के लिए निर्देशित किया गया, लेकिन हर बार एक जैसा गोलमोल उत्तर ही मिला।
50 लाख रुपये से अधिक गबन/वित्तीय अनियमितता
जांच अधिकारी द्वारा 92 लाख रुपये की अनियमितता से बरी करने के शिकायतकर्ता के मूल आरोप से बरी किये जाने के उपरांत, जांच के दौरान अन्य मामलों में 50 लाख रुपये से अधिक का गबन/समिति का वित्तीय हानि पायी गयी है। हालांकि, यहां भी जांच अधिकारी ने सोसाइटी अध्यक्ष लखविंद्र सिंह को, अध्यक्ष के कर्तव्य में भारी चूक के बावजूद बाइज्जत बरी कर दिया और उसका कोई उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं किया गया।
ये बिन्दू हैं –
– आहूजा फर्टिलाइजर से लेनदारी/देनदारी में 1 लाख 88 हजार 732 रुपये का ऋणात्मक अंतर, राशि व्यवस्थापक से वसूली योग्य।
– वर्षों तक सीमा से अधिक नगदी रखने पर समिति को ब्याज के रूप में 13 लाख 57 हजार 886 रुपये की हानि हुई। यह केवल व्यवस्थापक से वसूली योग्य बतायी गयी।
– संतुलन चित्र में कृषि विभाग से लेनदारी पेटे 34 लाख 64 हजार 864 रुपये की राशि दर्शायी गयी है जबकि कृषि विभाग ने कोई भी राशि बकाया होने से इंकार किया है। यह राशि व्यवस्थापक से वसूली योग्य बतायी गयी है।
सबसे सक्रिय सहकार नेता हैं लखविंद्र सिंह
सोसाइटी के उपनियमों के अनुसार, प्रति सप्ताह सोसाइटी की कैश बुक चेक करके हस्ताक्षर करने का सोसाइटी अध्यक्ष का दायित्व है। सोसाइटी में यदि वर्षों तक ऐसी गड़बडिय़ां चलती रही तो प्रश्न यह है कि सोसाइटी अध्यक्ष लखविंद्र सिंह को बराबर का दोषी क्यों नहीं माना गया? जबकि लखविंद्रसिंह, सहकारिता के प्रत्येक श्रेणी की कोऑपरेटिव सोसाइटियों से जुड़े रहे हैं। वे क्रय व्रिकय सहकारी समिति, ग्राम सेवा सहकारी समिति, प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के अध्यक्ष हैं। जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (गंगमूल डेयरी) के दो बार संचालक मंडल सदस्य रह चुके हैं। श्रीगंगानगर जिला सहकारी उपभोक्ता होललेस भंडार और जिला सहकारी संघ के संचालक मंडल सदस्य हैं। जिला सहकार संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। इफको, कृभको और भूमि विकास बैंक के डेलिगेट मेम्बर हैं। उनकी सोसाइटी राजफैड, कॉनफैड की सदस्य है। ऐसा सक्रिय सहकार नेता, सोसाइटी के उपनियमों की जानकारी नहीं रखता होगा, ऐसा संभव नहीं है।
24 मतदाताओं वाले जिला सहकार संघ के ‘चुनाव’ निर्विरोध सम्पन्न





